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mahabharat 5.178.69: यद्यपि महाबली भगीरथ की पुत्री निष्पाप गंगा इस कष्ट को देखने के योग्य नहीं है, तथापि जिसने तुम्हारे जैसे युद्धप्रिय, अधीर और मूर्ख पुत्र को जन्म दिया है, उसे यह कष्ट सहना ही पड़ेगा॥ 69॥   |   mahabharat अध्याय 5.178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  5.178.69 
अतदर्हा महाभागा भगीरथसुतानघा।
या त्वामजीजनन्मन्दं युद्धकामुकमातुरम्॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि महाबली भगीरथ की पुत्री निष्पाप गंगा इस कष्ट को देखने के योग्य नहीं है, तथापि जिसने तुम्हारे जैसे युद्धप्रिय, अधीर और मूर्ख पुत्र को जन्म दिया है, उसे यह कष्ट सहना ही पड़ेगा॥ 69॥
 
Although the sinless Ganga, daughter of the mighty Bhagiratha, is not worthy of seeing this suffering, yet she who has given birth to a warlike, impatient and foolish son like you will have to endure this pain.॥ 69॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)