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mahabharat 5.178.66-67: कुरुनन्दन! देखो, मैं तुम्हारे साथ युद्ध के लिए कुरुक्षेत्र जा रहा हूँ। परंतप! वहाँ आओ। मैं तुम्हारी इच्छा पूरी करूँगा। वहाँ तुम्हारी माँ गंगा तुम्हें मेरे हाथों से मरा हुआ देखेगी, सैकड़ों बाणों से बिंधकर कौओं, चींटियों और गिद्धों का आहार बन जाओगी। 66-67   |   mahabharat अध्याय 5.178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.178.66-67 
अयं गच्छामि कौरव्य कुरुक्षेत्रं त्वया सह।
भाषितं ते करिष्यामि तत्रागच्छ परंतप॥ ६६॥
तत्र त्वां निहतं माता मया शरशताचितम्।
जाह्नवी पश्यतां भीष्म गृध्रकङ्कबलाशनम्॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
कुरुनन्दन! देखो, मैं तुम्हारे साथ युद्ध के लिए कुरुक्षेत्र जा रहा हूँ। परंतप! वहाँ आओ। मैं तुम्हारी इच्छा पूरी करूँगा। वहाँ तुम्हारी माँ गंगा तुम्हें मेरे हाथों से मरा हुआ देखेगी, सैकड़ों बाणों से बिंधकर कौओं, चींटियों और गिद्धों का आहार बन जाओगी। 66-67
 
Kurunandan! Look, I am going with you to the Kurukshetra for battle. Parantapa! Come there. I will fulfill your wish. There your mother Ganga will see you dead at my hands, pierced by hundreds of arrows and become food for crows, ants and vultures. 66-67.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)