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mahabharat 5.178.65: भीष्म कहते हैं - हे भरतपुत्र! तब परशुराम ने मुस्कुराते हुए कहा - 'भीष्म! यह बड़े सौभाग्य की बात है कि तुम युद्धभूमि में मुझसे युद्ध करना चाहते हो।'   |   mahabharat अध्याय 5.178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  5.178.65 
भीष्म उवाच
ततो मामब्रवीद् राम: प्रहसन्निव भारत।
दिष्टॺा भीष्म मया सार्धं योद्धुमिच्छसि संगरे॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - हे भरतपुत्र! तब परशुराम ने मुस्कुराते हुए कहा - 'भीष्म! यह बड़े सौभाग्य की बात है कि तुम युद्धभूमि में मुझसे युद्ध करना चाहते हो।'
 
Bhishma says - O son of Bharata! Then Parshuram said to me smilingly - 'Bhishma! It is a matter of great fortune that you want to fight with me in the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)