श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  5.178.63 
न तदा जातवान् भीष्म: क्षत्रियो वापि मद्विध:।
पश्चाज्जातानि तेजांसि तृणेषु ज्वलितं त्वया॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
उन दिनों भीष्म और मेरे समान कोई क्षत्रिय उत्पन्न नहीं हुआ था। तेजस्वी क्षत्रिय तो बाद में उत्पन्न हुए। आप घास के बीच में चमकते रहे हैं (आपने तिनके के समान दुर्बल क्षत्रियों पर अपना तेज प्रकट किया है)॥ 63॥
 
‘In those days no Kshatriya like Bhishma or me was born. The illustrious Kshatriyas were born later. You have shone brightly among the grass (you have revealed your brilliance on the Kshatriyas who were as weak as straws).॥ 63॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)