श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  5.178.60 
अपि यत्र त्वया राम कृतं शौचं पुरा पितु:।
तत्राहमपि हत्वा त्वां शौचं कर्तास्मि भार्गव॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
भृगु नन्दन परशुराम! जहाँ पूर्वकाल में आपने अपने पिता को अपने हाथ अर्पित करके आत्मशुद्धि का अनुभव किया था, वहीं मैं भी आपको मारकर अपनी आत्मा को पवित्र करूँगा।
 
Bhrigu Nandan Parshuram! Where in the past you experienced self-purification by offering your hands to your father, there I too will purify my soul by killing you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)