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अपि यत्र त्वया राम कृतं शौचं पुरा पितु:।
तत्राहमपि हत्वा त्वां शौचं कर्तास्मि भार्गव॥ ६०॥
अनुवाद
भृगु नन्दन परशुराम! जहाँ पूर्वकाल में आपने अपने पिता को अपने हाथ अर्पित करके आत्मशुद्धि का अनुभव किया था, वहीं मैं भी आपको मारकर अपनी आत्मा को पवित्र करूँगा।
Bhrigu Nandan Parshuram! Where in the past you experienced self-purification by offering your hands to your father, there I too will purify my soul by killing you.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥