श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  5.178.58 
तत्र त्वं निहतो राम मया शरशतार्दित:।
प्राप्स्यसे निर्जिताँल्लोकान् शस्त्रपूतो महारणे॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
हे राम! उस महायुद्ध में जब तुम मेरे सैकड़ों बाणों से पीड़ित होकर मारे जाओगे, तब तुम पुण्यकर्मों से जीते हुए दिव्य लोकों को प्राप्त करोगे।
 
Rama! In that great war, when you are afflicted by hundreds of my arrows and killed, you will attain the divine worlds won by pious deeds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)