Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.178.51-52: यदि ब्राह्मण क्षत्रिय की भाँति धनुष-बाण लेकर क्रोधपूर्वक युद्ध करे और पीठ दिखाकर भाग न जाए, तो जो योद्धा उसे इस अवस्था में देखकर उसका वध करता है, वह ब्राह्मण-हत्या का दोषी नहीं होता, ऐसा धर्मशास्त्रों का निर्णय है। हे तपधान! मैं क्षत्रिय हूँ और क्षत्रियों के धर्म का पालन करता हूँ। 51-52। | mahabharat अध्याय 5.178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि ब्राह्मण क्षत्रिय की भाँति धनुष-बाण लेकर क्रोधपूर्वक युद्ध करे और पीठ दिखाकर भाग न जाए, तो जो योद्धा उसे इस अवस्था में देखकर उसका वध करता है, वह ब्राह्मण-हत्या का दोषी नहीं होता, ऐसा धर्मशास्त्रों का निर्णय है। हे तपधान! मैं क्षत्रिय हूँ और क्षत्रियों के धर्म का पालन करता हूँ। 51-52।
‘If a Brahmin, like a Kshatriya, takes up his bow and arrow and fights in anger and does not turn his back and run away, then the warrior who kills him after seeing him in this condition is not guilty of killing a brahmin, this is the verdict of the religious scriptures. O Tapadhan! I am a Kshatriya and I follow the religion of the Kshatriyas. 51-52.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥