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mahabharat 5.178.46: हे राम! मैं इंद्र के भय से भी धर्म का परित्याग नहीं कर सकता। आप प्रसन्न हों या न हों। जो कुछ भी करना हो, शीघ्र करो।' 46.   |   mahabharat अध्याय 5.178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.178.46 
न भयाद् वासवस्यापि धर्मं जह्यां महाव्रत।
प्रसीद मा वा यद् वा ते कार्यं तत् कुरु मा चिरम्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
हे राम! मैं इंद्र के भय से भी धर्म का परित्याग नहीं कर सकता। आप प्रसन्न हों या न हों। जो कुछ भी करना हो, शीघ्र करो।' 46.
 
Great devotee Rama! I cannot abandon Dharma even out of fear of Indra. You may or may not be pleased. Whatever you have to do, do it quickly.' 46.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)