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mahabharat 5.178.45: जो स्त्री परपुरुष में आसक्ति रखती है, वह सर्पिणी के समान भयंकर है। ऐसा कौन पुरुष होगा जो उसे जानकर अपने घर में स्थान देगा? क्योंकि स्त्रियों का दोष (परपुरुष में आसक्ति रूपी) महान अनर्थ का कारण है॥ 45॥   |   mahabharat अध्याय 5.178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  5.178.45 
को जातु परभावां हि नारीं व्यालीमिव स्थिताम्।
वासयेत गृहे जानन् स्त्रीणां दोषो महात्यय:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
जो स्त्री परपुरुष में आसक्ति रखती है, वह सर्पिणी के समान भयंकर है। ऐसा कौन पुरुष होगा जो उसे जानकर अपने घर में स्थान देगा? क्योंकि स्त्रियों का दोष (परपुरुष में आसक्ति रूपी) महान अनर्थ का कारण है॥ 45॥
 
‘A woman who has affection for another man is as dangerous as a female serpent. Who would be such a man who would knowingly give her a place in his house? Because the fault of women (in the form of affection for another man) is the cause of great disaster.॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)