श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  5.178.43 
तथा ब्रुवन्तं तमहं रामं परपुरंजयम्।
नैतदेवं पुनर्भावि ब्रह्मर्षे किं श्रमेण ते॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार बातें करते हुए मैंने शत्रुनगर के विजेता परशुरामजी से स्पष्ट कहा - 'ब्रह्मर्षि! ऐसी बात फिर कभी नहीं हो सकती। इस विषय में आपके प्रयत्न से क्या सिद्धि होगी?॥ 43॥
 
While talking like this, I clearly told Parashurama, the conqueror of Shatrunagar, - 'Brahmarshi! Such a thing cannot happen again. What will your efforts achieve in this matter?॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)