श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  5.178.42 
गृहाणेमां महाबाहो रक्षस्व कुलमात्मन:।
त्वया विभ्रंशिता हीयं भर्तारं नाधिगच्छति॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
‘महाबाहो! इसे स्वीकार करो और इस प्रकार अपने कुल की रक्षा करो। इसे पति नहीं मिल रहा है, क्योंकि तुम अपनी मर्यादा से गिर गये हो।’
 
‘Mahabaho! Accept her and thus protect your clan. She is not getting a husband because you have fallen from your limits.’
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)