श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.178.4 
न तु शस्त्रं ग्रहीष्यामि कथंचिदपि भाविनि।
ऋते नियोगाद् विप्राणामेष मे समय: कृत:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
भाविनी! मैंने प्रतिज्ञा की है कि ब्राह्मणों की अनुमति के बिना मैं शस्त्र नहीं उठाऊँगा।'
 
Bhavini! I have vowed that I will not take up arms without the permission of the Brahmins.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)