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mahabharat 5.178.35-36h: यह सुनते ही परशुरामजी के नेत्र क्रोध से भर गए और वे इस प्रकार बोले - 'हे नरश्रेष्ठ! यदि तुम मेरी बात नहीं मानोगे, तो आज मैं तुम्हारे मन्त्रियों सहित तुम्हारा वध कर दूँगा।' उन्होंने यह बात बार-बार दोहराई।   |   mahabharat अध्याय 5.178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  5.178.35-36h 
अथ मामब्रवीद् राम: क्रोधपर्याकुलेक्षण:।
न करिष्यसि चेदेतद् वाक्यं मे नरपुङ्गव॥ ३५॥
हनिष्यामि सहामात्यं त्वामद्येति पुन: पुन:।
 
 
अनुवाद
यह सुनते ही परशुरामजी के नेत्र क्रोध से भर गए और वे इस प्रकार बोले - 'हे नरश्रेष्ठ! यदि तुम मेरी बात नहीं मानोगे, तो आज मैं तुम्हारे मन्त्रियों सहित तुम्हारा वध कर दूँगा।' उन्होंने यह बात बार-बार दोहराई।
 
On hearing this, Parsuram's eyes were filled with anger and he spoke to me thus - 'O best of men! If you do not listen to me, then today I will kill you along with your ministers.' He repeated this again and again. 35 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)