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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना
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श्लोक 33
श्लोक
5.178.33
शाल्वस्याहमिति प्राह पुरा मामेव भार्गव।
मया चैवाभ्यनुज्ञाता गतेयं नगरं प्रति॥ ३३॥
अनुवाद
भृगु नंदन! उसने पहले मेरे पास आकर कहा कि मैं शाल्वकी हूँ, तब मैंने उसे जाने की अनुमति दे दी और वह शाल्वराज के नगर में चली गई।
Bhrigu Nandan! She first came to me and said that she is Shalvaki, then I gave her permission to go and she went to the city of Shalvaraj.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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