श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  5.178.32 
ततस्तं वै विमनसमुदीक्ष्याहमथाब्रुवम्।
नाहमेनां पुनर्दद्यां ब्रह्मन् भ्रात्रे कथंचन॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
तब परशुराम को दुःखी देखकर मैंने उनसे कहा, 'ब्राह्मण! अब मैं किसी भी प्रकार उसका विवाह अपने भाई से नहीं कर सकता।'
 
Then, seeing Parasurama sad, I said to him, 'Brahmin! Now I cannot marry her to my brother in any way.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)