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mahabharat 5.178.29: इस तेजस्वी राजकुमारी को आपने धर्म से भ्रष्ट कर दिया है। यह आपके द्वारा स्पर्श की गई है, ऐसी अवस्था में इसे और कौन स्वीकार कर सकता है?॥29॥   |   mahabharat अध्याय 5.178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  5.178.29 
विभ्रंशिता त्वया हीयं धर्मादास्ते यशस्विनी।
परामृष्टां त्वया हीमां को हि गन्तुमिहार्हति॥ २९॥
 
 
अनुवाद
इस तेजस्वी राजकुमारी को आपने धर्म से भ्रष्ट कर दिया है। यह आपके द्वारा स्पर्श की गई है, ऐसी अवस्था में इसे और कौन स्वीकार कर सकता है?॥29॥
 
You have corrupted this glorious princess from Dharma. She has been touched by you, in such a condition who else can accept her?॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)