श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.178.28 
राम उवाच
भीष्म कां बुद्धिमास्थाय काशिराजसुता तदा।
अकामेन त्वयाऽऽनीता पुनश्चैव विसर्जिता॥ २८॥
 
 
अनुवाद
परशुराम बोले, "भीष्म! आपने स्वयं पत्नी-इच्छा से रहित होकर भी काशीराज की कन्या का अपहरण करके उसे अपने घर लाकर फिर निकाल दिया, इसके पीछे आपका क्या उद्देश्य था?"
 
Parsuram said, "Bheeshma! What was the intention behind you kidnapping the daughter of the King of Kashi, despite yourself being devoid of any desire for a wife, and bringing her to your home and then throwing her out again?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)