श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  5.178.25 
तमागतमहं श्रुत्वा विषयान्तं महाबलम्।
अभ्यगच्छं जवेनाशु प्रीत्या तेजोनिधिं प्रभुम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
जब मैंने सुना कि तेजस्विता और पराक्रमी भगवान परशुराम मेरे राज्य की सीमा पर आ पहुँचे हैं, तब मैं अत्यन्त प्रसन्न हुआ और शीघ्र ही उनके पास गया॥ 25॥
 
When I heard that the storehouse of brilliance and mighty Lord Parashurama had arrived at the border of my kingdom, I was very happy and quickly went to him.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)