Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.178.24: भीष्म कहते हैं - तत्पश्चात तीसरे दिन (हस्तिनापुर के बाहर) परमभक्त परशुरामजी ने एक स्थान पर रुककर मुझे संदेश दिया - 'हे राजन! मैं यहाँ आया हूँ। आप मेरा प्रिय कार्य कीजिए।'॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 5.178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  5.178.24 
भीष्म उवाच
ततस्तृतीये दिवसे संदिदेश व्यवस्थित:।
कुरु प्रियं स मे राजन् प्राप्तोऽस्मीति महाव्रत:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - तत्पश्चात तीसरे दिन (हस्तिनापुर के बाहर) परमभक्त परशुरामजी ने एक स्थान पर रुककर मुझे संदेश दिया - 'हे राजन! मैं यहाँ आया हूँ। आप मेरा प्रिय कार्य कीजिए।'॥ 24॥
 
Bhishma says - Thereafter on the third day (outside Hastinapur) Parashurama, a great devotee, stopped at a place and gave me a message - 'O King! I have come here. You do my favourite work.'॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)