भीष्म उवाच
ततस्तृतीये दिवसे संदिदेश व्यवस्थित:।
कुरु प्रियं स मे राजन् प्राप्तोऽस्मीति महाव्रत:॥ २४॥
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - तत्पश्चात तीसरे दिन (हस्तिनापुर के बाहर) परमभक्त परशुरामजी ने एक स्थान पर रुककर मुझे संदेश दिया - 'हे राजन! मैं यहाँ आया हूँ। आप मेरा प्रिय कार्य कीजिए।'॥ 24॥
Bhishma says - Thereafter on the third day (outside Hastinapur) Parashurama, a great devotee, stopped at a place and gave me a message - 'O King! I have come here. You do my favourite work.'॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥