श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.178.23 
न्यविशन्त तत: सर्वे परिगृह्य सरस्वतीम्।
तापसास्ते महात्मानो भृगुश्रेष्ठपुरस्कृता:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
वहाँ भृगुश्रेष्ठ परशुरामजी को आगे करके उन सभी तपस्वी मुनियों ने सरस्वती नदी के तट पर आश्रय लिया और वहीं रात्रि बिताई।
 
There, leading the best of Bhrigu, Parashurama, all those ascetic saints took shelter on the banks of the river Saraswati and spent the night there. 23.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)