न हि बाणा मयोत्सृष्टा: सज्जन्तीह शरीरिणाम्।
कायेषु विदितं तुभ्यं पुरा क्षत्रियसंगरे॥ १९॥
अनुवाद
मेरे द्वारा छोड़े हुए बाण मनुष्यों के शरीर में नहीं फँसते (वे उन्हें छेदकर निकल जाते हैं।) यह बात तुम पहले ही क्षत्रियों के साथ युद्ध करते समय जान चुके हो॥19॥
The arrows shot by me do not get stuck in the bodies of the mortals. (They pierce them and come out.) You have already known this in the past during the war with the Kshatriyas.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥