श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.178.17 
कार्यमेतन्महद् ब्रह्मन् काशिकन्यामनोगतम्।
गमिष्यामि स्वयं तत्र कन्यामादाय यत्र स:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे ब्रह्मन्! काशीराज की कन्या ने जो कार्य मन में किया है, वह महान है। उसकी सिद्धि के लिए मैं स्वयं इस कन्या को अपने साथ वहाँ ले जाऊँगा जहाँ भीष्म हैं॥ 17॥
 
O Brahman! The task which the daughter of the King of Kashi has in mind is great. For its accomplishment, I will myself take this girl along with me to the place where Bhishma is.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)