श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.178.16 
राम उवाच
स्मराम्यहं पूर्वकृतां प्रतिज्ञामृषिसत्तम।
तथैव च चरिष्यामि यथा साम्नैव लप्स्यते॥ १६॥
 
 
अनुवाद
परशुराम बोले, 'हे मुनि! मुझे अपनी पूर्व प्रतिज्ञा याद है, फिर भी मैं परस्पर सहयोग से इस कार्य को पूरा करने का प्रयत्न करूँगा।'
 
Parsuram said, 'O great sage! I remember my earlier vow, however, I will try to accomplish the task through mutual cooperation.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)