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mahabharat 5.178.11-15h: महामुने राम! प्रभु! ऐसा करने से आपका कहा हुआ सत्य होगा। वीर भार्गव! समस्त क्षत्रियों को पराजित करने के पश्चात् आपने ब्राह्मणों के मध्य यह प्रतिज्ञा की थी कि यदि कोई ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र ब्राह्मणों से द्वेष रखेगा, तो मैं उसका वध अवश्य करूँगा। साथ ही, मैं अपने जीते जी भय के कारण मेरी शरण में आए हुए शरणार्थियों का भी परित्याग नहीं कर सकूँगा और उस महापुरुष का भी वध कर दूँगा, जो युद्ध में एकत्रित समस्त क्षत्रियों को परास्त कर देगा।   |   mahabharat अध्याय 5.178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 178: अम्बा और परशुरामजीका संवाद, अकृतव्रणकी सलाह, परशुराम और भीष्मकी रोषपूर्ण बातचीत तथा उन दोनोंका युद्धके लिये कुरुक्षेत्रमें उतरना  »  श्लोक 11-15h
 
 
श्लोक  5.178.11-15h 
वाक्यं सत्यं च ते वीर भविष्यति कृतं विभो।
इयं चापि प्रतिज्ञा ते तदा राम महामुने॥ ११॥
जित्वा वै क्षत्रियान् सर्वान् ब्राह्मणेषु प्रतिश्रुता।
ब्राह्मण: क्षत्रियो वैश्य: शूद्रश्चैव रणे यदि॥ १२॥
ब्रह्मद्विड् भविता तं वै हनिष्यामीति भार्गव।
शरणार्थे प्रपन्नानां भीतानां शरणार्थिनाम्॥ १३॥
न शक्ष्यामि परित्यागं कर्तुं जीवन् कथंचन।
यश्च कृत्स्नं रणे क्षत्रं विजेष्यति समागतम्॥ १४॥
दीप्तात्मानमहं तं च हनिष्यामीति भार्गव।
 
 
अनुवाद
महामुने राम! प्रभु! ऐसा करने से आपका कहा हुआ सत्य होगा। वीर भार्गव! समस्त क्षत्रियों को पराजित करने के पश्चात् आपने ब्राह्मणों के मध्य यह प्रतिज्ञा की थी कि यदि कोई ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र ब्राह्मणों से द्वेष रखेगा, तो मैं उसका वध अवश्य करूँगा। साथ ही, मैं अपने जीते जी भय के कारण मेरी शरण में आए हुए शरणार्थियों का भी परित्याग नहीं कर सकूँगा और उस महापुरुष का भी वध कर दूँगा, जो युद्ध में एकत्रित समस्त क्षत्रियों को परास्त कर देगा।
 
‘Mahamune Ram! Prabhu! By doing so, what you said will come true. Brave Bhaargava! After defeating all the Kshatriyas, you had made a promise among the Brahmins that if any Brahmin, Kshatriya, Vaishya or Shudra bears enmity towards Brahmins, I will surely kill him. Also, I will not be able to abandon the refugees who have come to me for shelter out of fear while I am alive and I will also kill that illustrious man who will defeat all the Kshatriyas gathered in the war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)