श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 177: अकृतव्रण और परशुरामजीकी अम्बासे बातचीत  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.177.8 
निवेदितं मया ह्येतद् दु:खमूलं यथातथम्।
विधानं तत्र भगवन् कर्तुमर्हसि युक्तित:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
मैंने अपने दुःख का मूल कारण विस्तार से बता दिया है। हे प्रभु! अब आप अपनी बुद्धि के अनुसार इस विषय में जो उचित हो, वही कीजिए। ॥8॥
 
I have explained the root cause of my suffering in detail. O Lord! Now, please do what is right in this matter according to your own wisdom. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)