vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 5: उद्योग पर्व
»
अध्याय 177: अकृतव्रण और परशुरामजीकी अम्बासे बातचीत
»
श्लोक 6
श्लोक
5.177.6
एतद् विचार्य मनसा भवानेतद् विनिश्चयम्।
विचिनोतु यथान्यायं विधानं क्रियतां तथा॥ ६॥
अनुवाद
इस विषय पर मन में विचार करो और स्वयं ही निर्णय करो तथा जो उचित जान पड़े वही करो ॥6॥
Think over this matter in your mind and make a decision yourself and do what seems just. ॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×