श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 177: अकृतव्रण और परशुरामजीकी अम्बासे बातचीत  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  5.177.41 
एष मे क्रियमाणाया भारतेन तदा विभो।
अभवद्‍धृदि संकल्पो घातयेयं महाव्रतम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! जब से भरतवंशी भीष्म ने मुझे इस स्थिति में डाला है, तब से मेरे हृदय में एक ही विचार उत्पन्न हो रहा है कि उस महान भक्त को मार डालूँ ॥ 41॥
 
O Lord! Ever since Bhishma of the Bharata dynasty put me in this situation, the only thought that has arisen in my heart is to get that great devotee killed. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)