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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 177: अकृतव्रण और परशुरामजीकी अम्बासे बातचीत
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श्लोक 40
श्लोक
5.177.40
स हि लुब्धश्च नीचश्च जितकाशी च भार्गव।
तस्मात् प्रतिक्रिया कर्तुं युक्ता तस्मै त्वयानघ॥ ४०॥
अनुवाद
हे निष्पाप भार्गव! भीष्म लोभी, नीच और विजय के तेज से युक्त हैं; अतः उनसे बदला लेना ही तुम्हारे लिए उचित है॥40॥
O sinless Bhaargava! Bhishma is greedy, mean and full of the glory of victory; therefore it is appropriate for you to take revenge from him. ॥ 40॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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