श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 177: अकृतव्रण और परशुरामजीकी अम्बासे बातचीत  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  5.177.38 
मम तु व्यसनस्यास्य भीष्मो मूलं महाव्रत:।
येनाहं वशमानीता समुत्क्षिप्य बलात् तदा॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
मेरे दुर्भाग्य का मुख्य कारण महाव्रती भीष्म हैं, जिन्होंने उस समय मुझे बलपूर्वक उठाकर अपने रथ पर बिठाया और इस प्रकार वश में करके हस्तिनापुर ले आये।
 
The main reason for my misfortune is the great fasting Bhishma, who at that time forcefully picked me up, placed me on his chariot and thus, having subdued me, brought me to Hastinapur. 38.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)