श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 177: अकृतव्रण और परशुरामजीकी अम्बासे बातचीत  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  5.177.37 
एतत् सर्वं विनिश्चित्य स्वबुद्धॺा भृगुनन्दन।
यदत्रौपयिकं कार्यं तच्चिन्तयितुमर्हसि॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
भृगु नन्दन! इन सब बातों पर बुद्धिपूर्वक विचार करके जो उचित लगे, उसी में मन लगाओ। ॥37॥
 
Bhrigu Nandan! After thinking intelligently over all these matters, concentrate on the work that seems appropriate. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)