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सौभराजमुपेत्याहमवोचं दुर्वचं वच:।
न च मां प्रत्यगृह्णात् स चारित्र्यपरिशङ्कित:॥ ३६॥
अनुवाद
फिर मैं सौभराज के पास गयी और उनसे ऐसी बातें कहीं जो एक स्त्री के लिए कहना बहुत कठिन है; लेकिन उन्होंने मुझे स्वीकार नहीं किया क्योंकि उन्हें मेरे चरित्र पर संदेह था।
Then I went to Soubharaj and told him such things which are very difficult for a woman to say; but he did not accept me because he had doubts about my character.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥