श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 177: अकृतव्रण और परशुरामजीकी अम्बासे बातचीत  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  5.177.34 
अथवा ते मतिस्तत्र राजपुत्रि न वर्तते।
यावच्छाल्वपतिं वीरं योजयाम्यत्र कर्मणि॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
अथवा हे राजकन्या! यदि तुम वहाँ जाना नहीं चाहती हो तो मैं पहले इस कार्य के लिए वीर शाल्वराज को नियुक्त करूँगा (उसके साथ तुम्हारा विवाह करा दूँगा)॥34॥
 
Or, O princess! If you do not wish to go there, then I shall first appoint the valiant Shalvaraj for this task (I shall get you married to him).॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)