vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 5: उद्योग पर्व
»
अध्याय 177: अकृतव्रण और परशुरामजीकी अम्बासे बातचीत
»
श्लोक 33
श्लोक
5.177.33
न चेत् करिष्यति वचो मयोक्तं जाह्नवीसुत:।
धक्ष्याम्यहं रणे भद्रे सामात्यं शस्त्रतेजसा॥ ३३॥
अनुवाद
भद्रे! यदि गंगानन्दन भीष्म मेरी बात नहीं मानेंगे तो मैं युद्ध में अपने अस्त्रों की शक्ति से उन्हें उनके मन्त्रियों सहित भस्म कर दूँगा॥33॥
Bhadre! If Ganganandan Bhishma does not listen to me, then I will incinerate him along with his ministers with the power of my weapons in the war. 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×