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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 177: अकृतव्रण और परशुरामजीकी अम्बासे बातचीत
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श्लोक 27
श्लोक
5.177.27
अम्बोवाच
भगवञ्शरणं त्वाद्य प्रपन्नास्मि महाव्रतम्।
शोकपङ्कार्णवान्मग्नां घोरादुद्धर मां विभो॥ २७॥
अनुवाद
अम्बा बोली- हे प्रभु! आप महान भक्त हैं। आज मैं आपकी शरण में आई हूँ। हे प्रभु! मुझे इस घोर दुःख सागर में डूबने से बचाइए।
Amba said— O Lord! You are a great devotee. Today I have come to your refuge. O Lord! Save me from drowning in this terrible ocean of sorrow.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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