श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 177: अकृतव्रण और परशुरामजीकी अम्बासे बातचीत  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.177.26 
राम उवाच
यथा त्वं सृञ्जयस्यास्य तथा मे त्वं नृपात्मजे।
ब्रूहि यत् ते मनोदु:खं करिष्ये वचनं तव॥ २६॥
 
 
अनुवाद
परशुरामजी बोले- राजकन्या! जैसे तुम इस संजय की पौत्री हो, वैसे ही मेरी भी हो। जो कुछ तुम्हारे मन में हो, वह मुझसे कहो। मैं तुम्हारी आज्ञा के अनुसार ही सब कुछ करूँगा॥ 26॥
 
Parshuramji said- Princess! Just as you are the granddaughter of this Sanjaya, you are mine too. Tell me whatever is in your heart. I will do everything according to your instructions.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)