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mahabharat 5.177.21: वार्तालाप के अंत में राजर्षि होत्रवाहन ने महायोद्धा भृगुश्रेष्ठ परशुराम से मधुर वाणी में यह अर्थपूर्ण वचन कहा- 21॥   |   mahabharat अध्याय 5.177: अकृतव्रण और परशुरामजीकी अम्बासे बातचीत   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 177: अकृतव्रण और परशुरामजीकी अम्बासे बातचीत  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.177.21 
तथा कथान्ते राजर्षिर्भृगुश्रेष्ठं महाबलम्।
उवाच मधुरं काले रामं वचनमर्थवत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
वार्तालाप के अंत में राजर्षि होत्रवाहन ने महायोद्धा भृगुश्रेष्ठ परशुराम से मधुर वाणी में यह अर्थपूर्ण वचन कहा- 21॥
 
At the end of the conversation, Rajarshi Hotravahan said this meaningful word in a sweet voice to the great warrior Bhrigu Shrestha Parshuram - 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)