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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 177: अकृतव्रण और परशुरामजीकी अम्बासे बातचीत
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श्लोक 20
श्लोक
5.177.20
तत: पूर्वव्यतीतानि कथयन्तौ स्म तावुभौ।
आसातां जामदग्न्यश्च सृञ्जयश्चैव भारत॥ २०॥
अनुवाद
भरत! तत्पश्चात् परशुराम और सृंजय (होत्रवाहन) दोनों मित्र आपस में बैठकर पूर्वजन्म की घटनाओं पर चर्चा करने लगे।
Bharat! Thereafter both the friends Parasurama and Srinjaya (Hotravahan) sat together talking about the past events.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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