vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 5: उद्योग पर्व
»
अध्याय 177: अकृतव्रण और परशुरामजीकी अम्बासे बातचीत
»
श्लोक 19
श्लोक
5.177.19
पूजयामासुरव्यग्रा मधुपर्केण भार्गवम्।
अर्चितश्च यथान्यायं निषसाद सहैव तै:॥ १९॥
अनुवाद
फिर स्वस्थ होकर उसने मधुपर्क से भार्गव परशुरामजी का पूजन किया और भलीभाँति पूजन करके उनके साथ वहीं बैठ गया॥19॥
Then, regaining his health, he worshipped Bhargava Parashurama with Madhupark. After being worshipped properly, he sat there with him.॥19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×