Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.177.13-14: अम्बा बोली - हे ब्रह्मन्! मेरे मन में भी सदैव यही इच्छा रहती है कि मैं युद्ध में भीष्म को मार डालूँ। हे महाबाहो! भीष्म या शाल्वराज, जिसे भी आप दोषी समझते हैं, उसे दण्ड दीजिए, जिसके कारण मैं महान दुःख में पड़ी हूँ।॥13-14॥ | mahabharat अध्याय 5.177: अकृतव्रण और परशुरामजीकी अम्बासे बातचीत । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अम्बोवाच
ममाप्येष सदा ब्रह्मन् हृदि कामोऽभिवर्तते।
घातयेयं यदि रणे भीष्ममित्येव नित्यदा॥ १३॥
भीष्मं वा शाल्वराजं वा यं वा दोषेण गच्छसि।
प्रशाधि तं महाबाहो यत्कृतेऽहं सुदु:खिता॥ १४॥
अनुवाद
अम्बा बोली - हे ब्रह्मन्! मेरे मन में भी सदैव यही इच्छा रहती है कि मैं युद्ध में भीष्म को मार डालूँ। हे महाबाहो! भीष्म या शाल्वराज, जिसे भी आप दोषी समझते हैं, उसे दण्ड दीजिए, जिसके कारण मैं महान दुःख में पड़ी हूँ।॥13-14॥
Amba said - O Brahman! I too always have this desire in my mind that I should kill Bhishma in the war. O mighty-armed one! Whoever you think is guilty, Bhishma or Shalvaraj, punish him, because of whom I have fallen into great sorrow.॥ 13-14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥