श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 177: अकृतव्रण और परशुरामजीकी अम्बासे बातचीत  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.177.10 
यदि त्वामापगेयो वै न नयेद् गजसाह्वयम्।
शाल्वस्त्वां शिरसा भीरु गृह्णीयाद् रामचोदित:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
कायर! यदि गंगानन्दन भीष्म तुम्हें हस्तिनापुर न ले जाते, तो परशुरामजी के कहने पर राजा शाल्व तुम्हें आदरपूर्वक स्वीकार कर लेते॥10॥
 
Coward! If Ganganandan Bhishma had not taken you to Hastinapur, then King Shalva would have accepted you respectfully at the behest of Parshuramji. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)