श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.176.7 
न च तेऽन्या गतिर्न्याय्या भवेद् भद्रे यथा पिता।
पतिर्वापि गतिर्नार्या: पिता वा वरवर्णिनि॥ ७॥
 
 
अनुवाद
भद्रे! तुम्हारे लिए अपने पिता की शरण लेना उचित है, उसके समान दूसरा कोई सहारा नहीं है। हे वरवर्णिनी! स्त्री के लिए उसका पति या पिता ही एकमात्र आश्रय है।॥7॥
 
Bhadra! It is justifiable for you to take shelter of your father, there is no other support like that. O Varvarnini! For a woman, her husband or father is the only shelter. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)