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mahabharat 5.176.55: शाल्वराज को उसके चरित्र पर संदेह था, इसलिए उसने उसका प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया। इसीलिए वह घोर तपस्या में लीन होकर इस तपोवन में आई है।   |   mahabharat अध्याय 5.176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.176.55 
प्रत्याचख्यौ च शाल्वोऽस्याश्चारित्रस्याभिशङ्कित:।
सेयं तपोवनं प्राप्ता तापस्येऽभिरता भृशम्॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
शाल्वराज को उसके चरित्र पर संदेह था, इसलिए उसने उसका प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया। इसीलिए वह घोर तपस्या में लीन होकर इस तपोवन में आई है।
 
Shalvaraj doubted her character; hence he rejected her proposal. That is why she has come to this Tapovan, being deeply engrossed in penance. 55.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)