श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  5.176.53 
अनुज्ञाता तु भीष्मेण शाल्वं सौभपतिं तत:।
कन्येयं मुदिता तत्र काले वचनमब्रवीत्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
भीष्म की आज्ञा पाकर वह कन्या मन में अत्यन्त प्रसन्न होकर सौभ विमान के स्वामी शाल्व के पास गई और उस समय इस प्रकार बोली -॥53॥
 
On receiving the command from Bhishma this girl, being very happy in her heart, went to Shalva, the owner of the Saubha aircraft and at that time spoke thus -॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)