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मया शाल्वपतिर्वीरो मनसाभिवृत: पति:।
न मामर्हसि धर्मज्ञ दातुं भ्रात्रेऽन्यमानसाम्॥ ५१॥
अनुवाद
हे धर्म के ज्ञाता! मैंने मन ही मन वीर शाल्वराज को पति के रूप में वरण कर लिया है; अतः मेरा मन अन्यत्र आसक्त होने के कारण आप मुझे अपने भाई के साथ विवाह न कराएं।'
O knower of Dharma! I have in my heart chosen the brave Shalvaraj as my husband; therefore, as my mind is attached elsewhere, you should not marry me to your brother.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥