Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.176.5-6: भद्र! घर छोड़कर तपस्वियों के समान धर्माचरण करने की आवश्यकता नहीं है। हमारे हितकारी वचन सुनो, तुम्हारा कल्याण हो। यहाँ से अपने पिता के घर जाओ। इसके बाद जो भी आवश्यक कार्य होगा, उसे तुम्हारे पिता काशीराज सोच-विचारकर करेंगे। कल्याणी! तुम वहाँ समस्त गुणों से युक्त होकर सुखपूर्वक निवास कर सकोगी।॥ 5-6॥ | mahabharat अध्याय 5.176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अलं प्रव्रजितेनेह भद्रे शृणु हितं वच:।
इतो गच्छस्व भद्रं ते पितुरेव निवेशनम्॥ ५॥
प्रतिपत्स्यति राजा स पिता ते यदनन्तरम्।
तत्र वत्स्यसि कल्याणि सुखं सर्वगुणान्विता॥ ६॥
अनुवाद
भद्र! घर छोड़कर तपस्वियों के समान धर्माचरण करने की आवश्यकता नहीं है। हमारे हितकारी वचन सुनो, तुम्हारा कल्याण हो। यहाँ से अपने पिता के घर जाओ। इसके बाद जो भी आवश्यक कार्य होगा, उसे तुम्हारे पिता काशीराज सोच-विचारकर करेंगे। कल्याणी! तुम वहाँ समस्त गुणों से युक्त होकर सुखपूर्वक निवास कर सकोगी।॥ 5-6॥
‘Bhadra! There is no need to leave home and engage in religious practices like the ascetics. Listen to our beneficial words, may you be blessed. Go from here to your father's house. After this, whatever necessary work will be done, your father Kashiraj will think and consider it. Kalyani! You will be able to live there happily, having all the virtues.॥ 5-6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥