श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  5.176.46 
समेतं पार्थिवं क्षत्रं काशिपुर्यां ततोऽभवत्।
कन्यानिमित्तं विप्रर्षे तत्रासीदुत्सवो महान्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मर्षे! संसार का समस्त क्षत्रिय समाज इन कन्याओं के लिए काशीपुरी में एकत्रित हुआ था। उस अवसर पर वहाँ एक महान स्वयंवरोत्सव का आयोजन किया गया था। 46॥
 
Brahmarshe! The entire Kshatriya community of the world had gathered for these girls in Kashipuri. On that occasion a great Swayamvarotsav was organized there. 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)