श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  5.176.40 
क्व सम्प्रति महाबाहो जामदग्न्य: प्रतापवान्।
अकृतव्रण शक्यो वै द्रष्टुं वेदविदां वर:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु अकृतव्रण! वेदवेत्ताओं में श्रेष्ठ और परशुरामपुत्र परशुरामजी को इस समय कहाँ देखा जा सकता है?॥40॥
 
Mahabahu Akritavrana! Where can one see Parasurama, the best among the Veda scholars and the mighty Jamadagni son of Parasurama at this time?'॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)