श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  5.176.35 
एवं ब्रुवति कन्यां तु पार्थिवे होत्रवाहने।
अकृतव्रण: प्रादुरासीद् रामस्यानुचर: प्रिय:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
जब राजा होत्रवाहन राजकुमारी अम्बा से इस प्रकार कह रहे थे, उसी समय परशुराम का प्रिय सेवक अकृतव्रण वहाँ प्रकट हुआ।
 
When King Hotravahan was speaking thus to Princess Amba, at that very time Akritavrana, the favourite servant of Parasurama, appeared there. 35.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)