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mahabharat 5.176.33: भद्रे! उसके बाद अपने मन में जो भी काम हो, वह सब उनसे कहो। मेरा नाम लेने पर परशुरामजी तुम्हारे सब काम कर देंगे॥33॥   |   mahabharat अध्याय 5.176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  5.176.33 
ब्रूयाश्चैनं पुनर्भद्रे यत् ते कार्यं मनीषितम्।
मयि संकीर्तिते राम: सर्वं तत् ते करिष्यति॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
भद्रे! उसके बाद अपने मन में जो भी काम हो, वह सब उनसे कहो। मेरा नाम लेने पर परशुरामजी तुम्हारे सब काम कर देंगे॥33॥
 
Bhadre! After that tell him all the work you want in your mind. On taking my name Parshuramji will do all your work. ॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)