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mahabharat 5.176.29: ‘किन्तु आज मैं उन विश्वविख्यात महात्मा का दर्शन कैसे कर सकूँगा और भृगुपुत्र परशुराम मेरी इस असह्य पीड़ा को कैसे दूर करेंगे? मैं यह सब जानना चाहता हूँ, ताकि वहाँ जा सकूँ।’॥29॥   |   mahabharat अध्याय 5.176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 176: तापसोंके आश्रममें राजर्षि होत्रवाहन और अकृतव्रणका आगमन तथा उनसे अम्बाकी बातचीत  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  5.176.29 
अपि नामाद्य पश्येयमार्यं तं लोकविश्रुतम्।
कथं च तीव्रं दु:खं मे नाशयिष्यति भार्गव:।
एतदिच्छाम्यहं ज्ञातुं यथा यास्यामि तत्र वै॥ २९॥
 
 
अनुवाद
‘किन्तु आज मैं उन विश्वविख्यात महात्मा का दर्शन कैसे कर सकूँगा और भृगुपुत्र परशुराम मेरी इस असह्य पीड़ा को कैसे दूर करेंगे? मैं यह सब जानना चाहता हूँ, ताकि वहाँ जा सकूँ।’॥29॥
 
‘But how will I be able to see that world-renowned great soul today and how will Bhrigu's son Parashurama remove this unbearable pain of mine? I wish to know all this so that I can go there.'॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)